बांकीपुर में 30 साल पुराना बीजेपी का किला ढहा: उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत- By Election Result।।
बांकीपुर में 30 साल पुराना बीजेपी का किला ढहा: उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत- By Election Result।।
पटना बांकीपुर/N5:
बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। राजधानी पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
आपको अवगत करा दूँ कि पिछले करीब 30-40 सालों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा है।
इस चुनाव में जहां प्रशांत किशोर को 64,151 वोट (49.23%) मिले, वहीं बीजेपी के नीरज कुमार को 44,827 वोट प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
जीत की लड्डू जश्न की तैयारियों के बीच बदला गणित ।
मतगणना की शुरुआत से पहले बांकीपुर सीट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह था। रुझान आने से पहले ही पार्टी कार्यालयों और दुकानों पर लड्डू बांटने और जीत का जश्न मनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। हालांकि, जैसे-जैसे मतगणना के राउंड आगे बढ़ते गए, प्रशांत किशोर ने लगातार अपनी बढ़त मजबूत रखी और अंततः एक एकतरफा जीत हासिल की।
जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने विरोधियों के प्रति विनम्रता दिखाते हुए कहा, "जो लोग चुनाव हार गए हैं, उन्हें भी मेरी ओर से बधाई। लोकतंत्र में हार-जीत लगी रहती है। लेकिन बांकीपुर का यह चुनाव केवल एक नया विधायक चुनने का चुनाव नहीं था, बल्कि यह बीजेपी-एनडीए सरकार और उसके नेतृत्व पर जनता का निर्णय था।
उन्होंने आगे कहा कि बांकीपुर की जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश दिया है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को विचार करना चाहिए और बिहार के हित में किसी योग्य और अच्छे व्यक्ति को राज्य की कमान सौंपनी चाहिए।"
"जनादेश का सम्मान, पार्टी करेगी गहन समीक्षा": विजय कुमार सिन्हा।
बीजेपी की हार और रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा:
"यह लोकतंत्र की भूमि है और भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा जनता के जनादेश को सहर्ष स्वीकार किया है। हम विपक्ष की तरह चुनाव आयोग या EVM पर हार का ठीकरा नहीं फोड़ते। हम संवैधानिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं। पार्टी इस हार की गहन समीक्षा करेगी।"
चलिए जानते हैं कि क्यों अहम है बांकीपुर का यह नतीजा?
बीजेपी के गढ़ में सेंध: बांकीपुर सीट लंबे समय से (पूर्व विधायक नितिन नवीन के कार्यकाल से) बीजेपी का पारंपरिक और सबसे सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। यहां हारना बीजेपी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है।
जन सुराज का खाता खुला: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के लिए यह पहली आधिकारिक और बेहद महत्वपूर्ण बजती जीत है।
पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव: चुनावी आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर बीजेपी और आरजेडी दोनों के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हुई है, जिसका सीधा फायदा जन सुराज को मिला।
