झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'इंडिया' गठबंधन में रार, कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने।।
रांची/नई दिल्ली/N5: झारखंड में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर की अंदरूनी कलह को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है। संख्या बल के हिसाब से सुरक्षित मानी जा रही सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद, गठबंधन के दो बड़े घटक दलों—कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD)—के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि 'इंडिया' गठबंधन अब केवल कागजों पर रह गया है और पूरी तरह टूट चुका है।
खबर ये है कि हार के बाद अपनों पर ही बरसी कांग्रेस:
चुनाव परिणाम सामने आते ही कांग्रेस खेमे में भारी असंतोष देखा जा रहा है। झारखंड कांग्रेस के प्रभारियों और नेताओं ने सहयोगी दल आरजेडी और वामपंथी दलों पर "भरोसातोड़ने" और भीतरघात करने का सीधा आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेताओं का गुस्सा आरजेडी पर इस कदर फूटा है, जिसकी तुलना राजनीतिक विश्लेषक पूर्व के विधानसभा चुनावों से कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस का यह आक्रामक रुख ठीक वैसा ही है, जैसा दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर कांग्रेस नेतृत्व द्वारा तीखे हमले के रूप में देखा गया था। जानकारों का कहना है कि जब भी राज्यों में चुनावी समीकरण बिगड़ते हैं, कांग्रेस अपने सहयोगियों को ही कटघरे में खड़ा करने लगती है।
आरजेडी ने कांग्रेस का पलटवार किया है कहा : "हम हनुमान नहीं जो सीना चीर कर दिखाएं"
कांग्रेस के आरोपों का आरजेडी ने भी बेहद तल्ख लहजे में जवाब दिया है। झारखंड आरजेडी नेतृत्व ने कहा कि वे लालू प्रसाद यादव के सिपाही हैं और कभी किसी को धोखा नहीं देते। आरजेडी ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को बिहार, हरियाणा और ओडिशा के अपने पुराने रिकॉर्ड देखने चाहिए, जहां उनके अपने विधायकों की अनुपस्थिति या क्रॉस-वोटिंग की वजह से गठबंधन को नुकसान हुआ था। आरजेडी नेताओं ने दोटूक कहा, "हम भगवान हनुमान नहीं हैं जो अपना सीना चीरकर अपनी वफादारी का सबूत दें।"
कांग्रेस पर पीएम का वो बयान फिर चर्चा में आया : "कोई ऐसा सगा नहीं..."
इस पूरे घटनाक्रम और विपक्षी दलों की आपसी सिरफुटव्वल के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर कसा गया वह पुराना और चर्चित तंज—"कोई ऐसा सगा नहीं, जिसे कांग्रेस ने ठगा नहीं"—एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक बयानों में गूंजने लगा है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि झारखंड का यह नतीजा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि यह गठबंधन सिर्फ सत्ता के लालच में बना एक स्वार्थी ढांचा था, जिसमें न तो कोई आपसी तालमेल है और न ही एक-दूसरे पर भरोसा।
चलिए आपको बताते है कि आख़िर क्या है पूरा मामला?
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए इस चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन (JMM-Congress-RJD) के पास जीत के लिए पर्याप्त विधायक थे। झामुमो (JMM) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम तो आसानी से जीत गए, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा आवश्यक 28 प्रथम वरीयता के वोट जुटाने में नाकाम रहे।
दूसरी ओर, एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने विपक्षी खेमे में लगी सेंध और क्रॉस-वोटिंग का फायदा उठाते हुए जीत दर्ज कर ली, जिसने 'इंडिया' ब्लॉक की एकता की पोल खोलकर रख दी है।
