पटना कोचिंग वॉर: खान सर और ज्ञान बिंदु के बीच छिड़ी जंग, गंभीर आरोपों से गरमाया बिहार का शिक्षा जगत।।
पटना कोचिंग वॉर: खान सर और ज्ञान बिंदु के बीच छिड़ी जंग, गंभीर आरोपों से गरमाया बिहार का शिक्षा जगत।।
पटना: बिहार की राजधानी पटना, जो देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक बड़ा केंद्र मानी जाती है, इन दिनों एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। पटना के दो सबसे चर्चित चेहरों—फैसल खान और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के संस्थापक रौशन आनंद—के बीच का विवाद अब केवल कोचिंग की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गोलीबारी, पुलिस कार्रवाई और बेहद संगीन आरोपों जैसे हत्या तक पहुंच चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के शिक्षा जगत और कोचिंग संस्थानों की आंतरिक सच्चाई पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद की शुरुआत एक कथित गोलीबारी की घटना से हुई, जिसके बाद फैसल खान ने एक तीखा बयान जारी किया था। उन्होंने ही ८ से १० राउंड गोलियां चलवाई हैं। खान सर का तर्क था कि चूंकि वे बहुत कम फीस पर गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं, इसलिए अन्य कोचिंग संस्थान उनके दुश्मन बन गए हैं।
हालांकि, मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस जांच और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने इस दावे की हवा निकाल दी। वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद यह बात सामने आई कि गोलीबारी कथित तौर पर फैसल खान के द्वारा ही करवाई गई थी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रौशन आनंद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
खान सर हमेशा से यह दावा करते आए हैं कि वे बिहार के गरीब बच्चों को बहुत ही न्यूनतम फीस पर शिक्षा दे रहे हैं। लेकिन हाल ही में जब मीडिया और विश्लेषकों ने इस दावे की जमीनी हकीकत खंगाली, तो आंकड़े कुछ और ही बयां करते दिखे।
जांच में सामने आया कि जिस रिकॉर्डेड क्लास के लिए खान सर के प्लेटफॉर्म पर ₹200 लिए जा रहे हैं, वही कोर्स बाजार में अन्य जगहों पर मात्र ₹99 में उपलब्ध है।
आलोचकों का आरोप है कि 'कम फीस' का एक बड़ा प्रचार तंत्र (मार्केटिंग) खड़ा किया गया है, जबकि वास्तविकता में यह अन्य प्रतिस्पर्धियों से अधिक या उनके बराबर ही है।
इस पूरे विवाद के बाद फैसल खान पर पटना के कोचिंग बाजार पर पूरी तरह से एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय विशेषज्ञों और छात्र संगठनों का मानना है कि इस विवाद के पीछे की असल नीयत पटना से अन्य सभी मजबूत कोचिंग संस्थानों को खत्म करना है, ताकि भविष्य में कोई चुनौती देने वाला न बचे।
आरोप यह भी है कि: यदि पटना से ज्ञान बिंदु और अन्य संस्थान समाप्त हो जाते हैं, तो शिक्षा के नाम पर मनमानी फीस वसूली का रास्ता साफ हो जाएगा, जो बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब छात्रों को पूरी तरह से दिवालिया कर देगा। ज्ञान बिंदु के रौशन आनंद को इसी रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा था।
मामले ने तब और राजनीतिक मोड़ ले लिया जब राजनेता तेज प्रताप यादव ने फैसल खान पर रौशन सर के भाई की मौत से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। वहीं, जेल से आने के बाद रौशन आनंद ने स्वयं यह आरोप लगाया कि उन्हें जेल के भीतर भी जान से मारने का प्रयास किया गया था। इस पूरे रवैये को लेकर सोशल मीडिया और बुद्धिजीवियों के बीच फैसल खान की तुलना 'बख्तियार खिलजी' से की जा रही है, जिसने बिहार की ऐतिहासिक शिक्षा व्यवस्था को तबाह कर दिया था।
लेख में उठाए गए संदर्भ के अनुसार, यह जानना जरूरी है कि तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने १२वीं सदी के अंत (लगभग ११९३ ईस्वी) में बिहार के गौरव और ज्ञान के वैश्विक केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय के साथ क्या किया था?
खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय पर आक्रमण कर उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। वहां स्थित दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी 'धर्मगंज' (जिसमें रत्नोदधि, रत्नसागर और रत्नरंजक नाम के तीन बड़े भवन थे) में आग लगा दी गई।
ऐसा कहा जाता है कि नालंदा की लाइब्रेरी में इतनी अधिक संख्या में पांडुलिपियां और किताबें थीं कि आग लगने के बाद वे तीन से छह महीने तक सुलगती रहीं। सदियों का संचित ज्ञान, विज्ञान, आयुर्वेद और दर्शनशास्त्र के दस्तावेज राख में बदल गए।
खिलजी की सेना ने वहां रह रहे हजारों बौद्ध भिक्षुओं, शिक्षकों और विद्वानों की बेरहमी से हत्या कर दी, जिससे भारत की प्राचीन उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ ही टूट गई।
निष्कर्ष: पटना का वर्तमान कोचिंग विवाद केवल दो शिक्षकों की लड़ाई नहीं, बल्कि बिहार के लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा की शुचिता से जुड़ा विषय बन गया है। जहां एक तरफ कानून इस पूरे मामले की जांच कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों के बीच इस बात को लेकर भारी चिंता है कि शिक्षा के इस बाजारीकरण और 'बाहुबल' के खेल में कहीं उनका भविष्य दांव पर न लग जाए।
