लालू प्रसाद यादव का 79वां जन्मदिन: राबड़ी आवास पर जुटी भीड़, लोक संस्कृति और सामाजिक न्याय के नारों से गूंजा बिहार।।

लालू प्रसाद यादव का 79वां जन्मदिन: राबड़ी आवास पर जुटी भीड़, लोक संस्कृति और सामाजिक न्याय के नारों से गूंजा बिहार।।

​पटना/N5:
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का 79वां जन्मदिन पटना में बेहद धूमधाम और राजनीतिक हलचल के बीच मनाया गया। इस खास मौके पर पटना स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर सुबह से ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। पार्टी कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और लालू परिवार के सदस्यों ने मिलकर उनके दीर्घायु होने की कामना की।

​पारिवारिक माहौल और जश्न: मीसा भारती ने दी शुभकामनाएं।

​जन्मदिन के इस खास अवसर पर लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार ने एकजुट होकर केक काटा। सांसद मीसा भारती ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा, "आज RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष का जन्मदिन है। RJD के सभी कार्यकर्ता और परिवार के लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। मैं भगवान से उनकी अच्छी सेहत की प्रार्थना करती हूँ।" पूरे आवास को फूलों और गुब्बारों से सजाया गया था और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला।

​सांस्कृतिक रंग: राबड़ी आवास पर 'लौंडा नाच' का आयोजन।

​इस बार लालू यादव के जन्मदिन को बिहार की पारंपरिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया। जन्मदिन के अवसर पर राबड़ी आवास में विशेष रूप से 'लौंडा नाच' का आयोजन किया गया। 

समर्थकों का कहना है कि यह लोक संस्कृति हमारी असली पहचान है और इसे जीवंत बनाए रखने की दिशा में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सोशल मीडिया पर आलोचकों को जवाब देते हुए समर्थकों ने कहा कि यह बिहार की धरोहर है, इसलिए किसी को इस पर "फालतू का ज्ञान" देने की जरूरत नहीं है।

​सामाजिक न्याय और 'मानसिक गुलामी से आजादी' की गूंज।

​लालू यादव के जन्मदिन के बहाने राजद ने इसे एक बार फिर सामाजिक न्याय के बड़े उत्सव के रूप में पेश किया। समर्थकों और उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (@laluprasadrjd) ने संदेश साझा करते हुए कहा:
​"लालू ने कुछ किया या नहीं किया! लालू ने गरीबों-पिछड़ों को मानसिक गुलामी से आजाद किया। जब इंसान मानसिक गुलामी से आजाद हो जाता है, तो आर्थिक आजादी खुद मिल जाती है!"

​कार्यकर्ताओं ने 1990 से पहले के बिहार की याद दिलाते हुए कहा कि एक दौर था जब पिछड़ों और दलितों को शिक्षा, खटिया पर बैठने या चप्पल पहनने तक के लिए प्रताड़ित किया जाता था। लालू प्रसाद यादव ने शोषित, वंचित, SC, ST और OBC वर्गों को समाज में सीना तानकर जीने का हौसला दिया।

​"लालू एक नाम नहीं, सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं"

​पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विचारकों ने लालू यादव के राजनीतिक सफर और उनके खिलाफ हुए षड्यंत्रों को भी याद किया, नेताओं ने पुरजोर तरीके से कहा कि;
​लालू जी केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक न्याय और वंचित तबकों की आवाज का एक सशक्त प्रतीक हैं।

​उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करने की कोशिशें आज की बात नहीं हैं; जब वे बिहार के मुख्यमंत्री थे या जब देश के रेल मंत्री बने, तब भी उन्हें कमजोर करने और उनकी लोकप्रियता को कम करने के अनेक प्रयास व षड्यंत्र हुए।

​लेकिन इतिहास गवाह है कि जिन नेताओं की जड़ें जनता के बीच गहराई तक होती हैं, उन्हें साजिशों के बल पर कभी मिटाया नहीं जा सकता।

​निष्कर्ष:
​कुल मिलाकर, लालू प्रसाद यादव का 79वां जन्मदिन केवल एक पारिवारिक उत्सव बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने बिहार की राजनीति में एक बार फिर पिछड़े-दलित विमर्श और मंडलवादी राजनीति की धार को ताजा कर दिया। जहां एक तरफ लोक कलाकारों ने समां बांधा, वहीं दूसरी तरफ राजद ने साफ संदेश दे दिया कि लालू यादव आज भी बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु बने हुए हैं।

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