अमेरिका से भारी मात्रा में LPG लेकर मंगलुरु पहुंचा विशाल जहाज 'पायक्सिस पायनियर'- ऊर्जा संकट के बीच भारत को मिली बड़ी राहत।।
मंगलुरु, 22 मार्च 2026; पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को एक बड़ी मजबूती मिली है। रविवार सुबह, अमेरिका के टेक्सास से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का एक विशाल खेप लेकर मालवाहक जहाज 'पायक्सिस पायनियर' (Pyxis Pioneer) कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट (NMPA) पर सफलतापूर्वक पहुंच गया।
इस खबर के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
जहाज का नाम: इस विशाल कार्गो शिप का नाम Pyxis Pioneer है।
माल (Cargo): यह जहाज LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) लेकर आया है।
यात्रा का स्रोत: यह शिप अमेरिका के टेक्सास (Texas) राज्य से चलकर भारत आया है।
स्थान: यह घटनाक्रम कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह (जिसे 'न्यू मंगलौर पोर्ट' भी कहा जाता है) की है।
महत्व: अमेरिका से भारत तक LPG का इतना बड़ा शिपमेंट आना ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति को दर्शाता है।
सिंगापुर के ध्वज वाला यह विशाल टैंकर 14 फरवरी को टेक्सास के पोर्ट ऑफ नीदरलैंड से रवाना हुआ था। लगभग पांच सप्ताह की लंबी समुद्री यात्रा के बाद, यह रविवार सुबह करीब 6 बजे मंगलुरु बंदरगाह के बर्थ नंबर 13 पर लगा।
LPG की मात्रा: यह जहाज 16,714 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आया है, जिसे 'एजिस लॉजिस्टिक्स' (Aegis Logistics) के लिए अनलोड किया जा रहा है।
वर्तमान में लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे समय में अमेरिका से सीधे मंगलुरु पहुंचे इस जहाज को भारत की 'विविधीकरण रणनीति' (Diversification Strategy) की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
हाल ही में भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी खाड़ी तट से प्रति वर्ष लगभग 2.2 मिलियन टन (MTPA) LPG आयात करने का पहला बड़ा दीर्घकालिक अनुबंध (Structured Contract) किया है, जो भारत की कुल वार्षिक खपत का लगभग 10% है। 'पायक्सिस पायनियर' का आगमन इसी रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है।
LPG की कमी और बढ़ती कीमतों से आम जनता को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। जहाजरानी मंत्रालय ने न्यू मंगलौर पोर्ट पर 14 मार्च से 31 मार्च 2026 तक कच्चे तेल और LPG जहाजों के लिए सभी कार्गो-संबंधित शुल्कों को माफ कर दिया है।
बंदरगाह प्रशासन ने ऊर्जा संकट को देखते हुए LPG जहाजों को 'प्रायोरिटी बर्थिंग' (Priority Berthing) की सुविधा दी है ताकि गैस की अनलोडिंग में देरी न हो। मंगलुरु में भारत की सबसे बड़ी भूमिगत LPG भंडारण सुविधा (80,000 मीट्रिक टन क्षमता) पहले से ही सक्रिय है, जो इस तरह की बड़ी खेपों को सुरक्षित रखने में मदद कर रही है।
आने वाले दिनों में और राहत की उम्मीद:
पोर्ट अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में LPG की आपूर्ति और तेज होगी। 25 मार्च: 'अपोलो ओशन' नामक जहाज इंडियन ऑयल (IOCL) के लिए 26,687 टन LPG लेकर पहुंचेगा। 29 मार्च: एक और अमेरिकी जहाज HPCL के लिए लगभग 30,000 टन गैस लेकर आने वाला है।
इन निरंतर आने वाली खेपों से दक्षिण भारत, विशेषकर कर्नाटक में हाल के दिनों में देखी गई कमर्शियल और घरेलू गैस की किल्लत दूर होने की पूरी उम्मीद है।