उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदले आंधी-तूफान के असार: IMD की चेतावनी।।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मार्च 2026 के मध्य में उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। एक सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के कारण इन इलाकों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 18 से 21 मार्च 2026 के दौरान मौसम खराब रहने का अनुमान है।
प्रभावित क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी है। वहीं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
ओलावृष्टि का अलर्ट: विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी जारी की गई है, जो इस समय फसलों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
किसानों पर पड़ने वाला प्रभाव
मार्च का महीना रबी फसलों की कटाई और पकने का समय होता है। ऐसे में बेमौसम बारिश और ओला गिरना किसानों के लिए "आसमान से आफत" जैसा है।
1. गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान
इस समय गेहूं की फसल पकने की कगार पर है। तेज हवाओं के साथ बारिश होने से फसलें खेतों में बिछ जाती हैं (जिसे 'लॉजिंग' कहते हैं), जिससे दाने काले पड़ सकते हैं या उनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। सरसों की फसल, जिसकी कटाई शुरू हो चुकी है, ओलावृष्टि से पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।
2. फलों के बागों पर संकट
हिमालयी क्षेत्रों (हिमाचल और उत्तराखंड) में सेब और अन्य गुठलीदार फलों (Stone Fruits) के पेड़ों पर इस समय फूल आने का समय होता है। ओलावृष्टि इन फूलों को झाड़ देती है, जिससे पूरे साल की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
3. तापमान में गिरावट और नमी
बारिश के कारण तापमान में अचानक 5-7°C तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। कटी हुई फसलें अगर खेतों में खुली पड़ी हैं, तो उनमें नमी बढ़ने से फफूंद (Fungus) लगने और सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि विशेषज्ञों और IMD ने किसानों को कुछ एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है:
सिंचाई रोकें: आने वाले कुछ दिनों तक फसलों में सिंचाई न करें, ताकि तेज हवा चलने पर फसलें जमीन पर न गिरें।
फसलों का भंडारण: यदि फसल काट ली गई है, तो उसे सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखें या तिरपाल से ढक दें।
कीटनाशकों का प्रयोग टालें: बारिश और तेज हवा के दौरान किसी भी प्रकार के खाद या कीटनाशक का छिड़काव न करें।
निष्कर्ष
बेमौसम की यह मार न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को चोट पहुंचाती है, बल्कि आने वाले समय में अनाज की कीमतों पर भी असर डाल सकती है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को स्थिति पर नजर रखने और प्रभावित किसानों के लिए उचित मुआवजे का आकलन करने की आवश्यकता है।