‘खाली सिलेंडर, खोखले वादे’ के साथ सरकार को घेरा-विपक्षी सांसदों का संसद में ज़ोरदार प्रदर्शन।।
नई दिल्ली | 25 मार्च, 2026: आज संसद परिसर में उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली जब विपक्षी दलों के सांसदों ने देश में गहराते LPG (रसोई गैस) संकट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
हाथों में ‘Empty Cylinders, Empty Promises’ (खाली सिलेंडर, खोखले वादे) लिखे बड़े बैनर और पोस्टर लेकर सांसदों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राकांपा (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पिछले कुछ हफ्तों से देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की भारी किल्लत है। लोग रिफिल के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं, लेकिन सरकार ठोस कदम उठाने के बजाय केवल आश्वासन दे रही है।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस वैश्विक संकट का भारतीय रसोई पर पड़ने वाले असर को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा की जाए।
संसद के मकर द्वार के पास एकत्रित हुए सांसदों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को "मुफ्त गैस" के सपने दिखाए गए थे, लेकिन आज हकीकत में सिलेंडर या तो मिल नहीं रहे हैं या उनकी कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने ‘नाम नरेंद्र, काम सरेंडर’ जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
वहीं दूसरी ओर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम सचिव ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि घरेलू गैस का उत्पादन बढ़ाया गया है और आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने जनता से 'पैनिक बुकिंग' न करने की अपील भी की है।
निष्कर्ष
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में यह मुद्दा अब और गरमाता दिख रहा है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार गैस संकट और महंगाई पर जवाबदेह कदम नहीं उठाती, सदन के भीतर और बाहर उनका विरोध जारी रहेगा।
