उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रतियों ने किया पारण, बिहार समेत देशभर में रही भक्ति की बयार- महापर्व चैती छठ संपन्न।।

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उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रतियों ने किया पारण, बिहार समेत देशभर में रही भक्ति की बयार- महापर्व चैती छठ संपन्न।। ​ बिहार/पटना: घाटों पर गूंजते 'कांच ही बांस के बहिनिया...' और 'उग हो सुरुज देव...' जैसे पारंपरिक छठ गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने नाक तक लंबा सिंदूर लगाकर और पारंपरिक परिधान पहनकर छठी मैया के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की। आस्था, पवित्रता और सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व 'चैती छठ' आज बुधवार (25 मार्च 2026) को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया।  बिहार के पटना, रोहतास, गया और मुजफ्फरपुर समेत तमाम जिलों में श्रद्धालुओं ने गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर उमड़कर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। यह व्रत अपनी कठिन साधना और पवित्रता के लिए जाना जाता है ​नहाय-खाय (22 मार्च): व्रत की शुरुआत आत्म-शुद्धि और सात्विक भोजन से हुई। ​खरना (23 मार्च): इस दिन व्रतियों ने दिनभर उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हुआ...

कोलकाता से 1500 मीट्रिक टन माल लेकर पांडु पोर्ट पहुँचा जहाज-पूर्वोत्तर में जलमार्ग क्रांति।।

कोलकाता से 1500 मीट्रिक टन माल लेकर पांडु पोर्ट पहुँचा जहाज-पूर्वोत्तर में जलमार्ग क्रांति।।

गुवाहाटी, 25 मार्च 2026: असम और संपूर्ण पूर्वोत्तर भारत के लिए व्यापार और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज हो गई है। टाटा स्टील (Tata Steel) द्वारा भेजी गई लगभग 1,500 मीट्रिक टन की एक बड़ी औद्योगिक खेप कोलकाता से चलकर गुवाहाटी के पांडु पोर्ट (Pandu Port) सफलतापूर्वक पहुँच गई है।

​यह खेप भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग (IBP Route) का उपयोग करते हुए यहाँ पहुँची है, जो न केवल समय की बचत करता है, बल्कि परिवहन की लागत को भी काफी कम कर देता है। 

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशाल खेप में 1,199 मीट्रिक टन (लगभग 23,980 बैग)। इसका उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट उत्पादन और निर्माण परियोजनाओं में किया जाता है। और TMT बार्स (सरिया) जो 300 मीट्रिक टन था।

​इस माल को टग MV त्रिशूल (Tug MV Trishul) और दो बाऱ्जेस D.B. दिखू (D.B. Dikhu) एवं D.B. अजय (D.B. Ajay) के जरिए लाया गया। यह खेप कोलकाता से रवाना होकर बांग्लादेश के जलमार्गों से गुजरते हुए ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के रास्ते पांडु पहुँची। जो प्रधानमंत्री के विजन और 'जलवाहक' योजना का परिणाम है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ब्रह्मपुत्र नदी अब एक जीवंत व्यापार और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में बदल रही है।

​यह सफल यात्रा हाल ही में शुरू की गई 'जलवाहक' (Jalvahak) योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय जलमार्गों पर लंबी दूरी के माल ढुलाई को प्रोत्साहित करना है। 

बता दूँ, हाल ही में प्रधानमंत्री ने पांडु पोर्ट को नेशनल हाईवे-27 से जोड़ने वाले ₹180 करोड़ के एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का भी उद्घाटन किया था, जिससे पोर्ट से माल की निकासी अब और भी आसान हो गई है।

सड़क और रेल मार्ग की तुलना में जलमार्ग से भारी माल ले जाना काफी सस्ता पड़ता है। जल परिवहन से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो इसे एक 'ग्रीन' लॉजिस्टिक्स विकल्प बनाता है।

​टाटा स्टील और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसे बड़े औद्योगिक समूहों द्वारा इस मार्ग का उपयोग करना यह दर्शाता है कि अब पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए कच्चा माल सीधे और सुलभ तरीके से उपलब्ध होगा।

​निष्कर्ष
​पांडु पोर्ट पर इस खेप का पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग अब पूरी तरह से क्रियाशील और विश्वसनीय है। आने वाले समय में, असम केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया और शेष भारत के बीच व्यापार का एक प्रमुख केंद्र (Hub) बनकर उभरेगा।

​रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क

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