संपादकीय: तेजप्रताप का 'विलय' वाला दांव—सियासी मजाक या किसी बड़े तूफान की आहट?
✍️ संपादकीय: तेजप्रताप का 'विलय' वाला दांव—सियासी मजाक या किसी बड़े तूफान की आहट?
बिहार की राजनीति में 'बयानों के बाजीगर' कहे जाने वाले तेजप्रताप यादव ने एक बार फिर ऐसा दांव चला है जिसने सियासी पंडितों को उलझा दिया है। उनका यह कहना कि "आरजेडी (RJD) का विलय मेरी पार्टी जेजेडी (JJD) में होने वाला है", पहली नजर में एक मजाकिया बयान लग सकता है, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसके कई अर्थ निकाले जा रहे हैं।
विरासत की जंग या वजूद की लड़ाई?
लालू प्रसाद यादव की विरासत को संभालने की रेस में भले ही तेजस्वी यादव अर्जुन की तरह मुख्य भूमिका में हों, लेकिन तेजप्रताप यादव समय-समय पर अपनी 'कृष्ण' वाली भूमिका को याद दिलाते रहते हैं। जनशक्ति परिषद (JJD) का गठन उन्होंने अपनी अलग जमीन तैयार करने के लिए किया था। अब आरजेडी के विलय की बात कहकर उन्होंने सीधा संदेश दिया है कि वे खुद को किसी से कम नहीं आंकते।
आरजेडी के लिए असहज स्थिति
एक तरफ तेजस्वी यादव पार्टी को ए-टू-जेड (A to Z) की पार्टी बनाने और अनुशासित दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं तेजप्रताप के ऐसे बयान विरोधियों को बैठे-बिठाए मुद्दा दे देते हैं। जेडीयू और बीजेपी जैसे दल इस बयान को 'परिवारवाद के भीतर बिखराव' के रूप में पेश कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह बयान सिर्फ सुर्खियों में बने रहने की कोशिश है, या फिर पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा से नाराज तेजप्रताप का कोई शक्ति प्रदर्शन?
कार्यकर्ताओं में असमंजस
आरजेडी का आधार उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। जब शीर्ष नेतृत्व के परिवार से ही इस तरह के विरोधाभासी बयान आते हैं, तो जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। विलय की बात तकनीकी रूप से असंभव लग सकती है, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से यह 'नेतृत्व के संघर्ष' को उजागर करती है।
निष्कर्ष
बिहार की राजनीति में तेजप्रताप यादव एक ऐसी पहेली हैं जिन्हें डिकोड करना आसान नहीं है। उनका यह बयान भले ही आज चर्चा का विषय हो, लेकिन यह आरजेडी के भविष्य की एकजुटता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। क्या लालू प्रसाद यादव अपने दोनों बेटों के राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच सेतु बन पाएंगे, या फिर 'विलय' और 'विभाजन' की यह बयानबाजी पार्टी की राह मुश्किल करेगी?
यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि फिलहाल तो गेंद उनके पाले में है।
N5Bharat ब्यूरो
