"उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के बिना बीजेपी को हराना असंभव- सपा सांसद इकरा हसन।"
लखनऊ/शामली: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच बयानों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। पहले भी तेज था। अब कांग्रेस के लोग धीरे-धीरे अपना रूप दर्शन कराना शुरू कर दिए है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की वो राजनीतिक ऐसा कोई सगा नहीं जिसे ठगा नहीं सामने आने लगे हैं। झलक दिखाई देने लगे हैं।
यह उसी का एक कङी है कि हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की भूमिका को लेकर दिए बयान दिया था। उसके बयान पर कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने बेहद तल्ख और करारा पलटवार किया है। इकरा हसन ने इमरान मसूद की टिप्पणी को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और बेवकूफी भरा करार देते हुए राज्य में सपा की मजबूत स्थिति का बचाव किया है।
इमरान मसूद के बयान को बताया गैर-जिम्मेदाराना
सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की राजनीतिक ताकत और अखिलेश यादव के जनाधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "यह बयान पूरी तरह से बेवकूफी भरा है। उत्तर प्रदेश के मौजूदा सियासी परिदृश्य में अखिलेश यादव ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सीधे तौर पर शिकस्त दे सकते हैं।" इकरा हसन ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस तरह के कांग्रेस के "बड़बोले नेताओं" की बयानबाजी की सच्चाई अच्छे से पता है।
गठबंधन टूटने पर कांग्रेस को होगा नुकसान
इंडिया (INDIA) गठबंधन के भविष्य और आगामी चुनावी रणनीतियों पर अपनी बात रखते हुए इकरा हसन ने कांग्रेस को भी सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन कायम रहता है, तो यह स्थिति दोनों दलों के लिए और विशेष रूप से कांग्रेस के लिए बेहतर होगी। हालांकि, अगर यह गठबंधन टूटता है, तो इसका बड़ा नुकसान केवल कांग्रेस पार्टी को ही उठाना पड़ेगा, समाजवादी पार्टी पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सपा का अपना मजबूत वोट बैंक और ठोस सियासी आधार है, जबकि कांग्रेस अपने दम पर राज्य में कुछ खास नहीं कर सकती।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में गरमाई हलचल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले दो प्रमुख नेताओं—इमरान मसूद और इकरा हसन—के बीच हुई इस जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक पारे को चढ़ा दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस नेता गठबंधन में जल्दी सीट शेयरिंग की मांग उठा रहे हैं, वहीं सपा नेतृत्व विपक्षी खेमे में अखिलेश यादव के नेतृत्व को ही सर्वोपरि मान रहा है। इकरा हसन के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी यूपी में खुद को बड़े भाई की भूमिका से पीछे हटाने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
N5 Views: इकरा हसन के इस कड़े बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा सकते हैं जैसे;
सपा का दबाव राजनीति का तरीका: इकरा हसन का बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी किसी भी भावी चुनाव या गठबंधन के मोलभाव के मूड में नहीं है और कांग्रेस पर हावी रहने का संदेश दे रही है।
कांग्रेस के अस्तित्व पर सवाल: उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि कांग्रेस बिना सपा के यूपी में कोई बड़ा प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहेगी। और यह सोलह आना सच भी है। जिससे कांग्रेस के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। दोनों दलों कार्यकर्ताओं के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है।
गठबंधन में खटास की संभावना: यद्यपि दोनों दल केंद्र स्तर पर साथ दिखने की कोशिश करते हैं, लेकिन राज्य स्तर पर सीटों के बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तनाव अब जगजाहिर हो चुका है।
स्पष्ट: हालिया घटनाक्रम में कांग्रेस नेता इमरान मसूद द्वारा पिछले कई माह से किये गए टिप्पणियों के बाद जो विवाद खड़ा हुआ है, उससे कांग्रेस नेता मसूद न केवल अपना राजनीतिक नुकसान कर लिया है, बल्कि कांग्रेस की स्थिति भी खराब कर दिया है। इकरा हसन के इस बयान के बाद अब कांग्रेस खेमे से प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। देखना यह होगा कि इमरान मसूद और कांग्रेस नेतृत्व इस सीधी चुनौती का किस प्रकार जवाब देते हैं।
स्रोत: न्यूज एजेंसी, लीडर, सोशल मीडिया और विश्वसनीय सूत्र आदि।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
